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सिडनी में भारत की हार के कारण

भारतीय टीम एक बार फिर सिडनी टेस्ट में ऑस्‍ट्रेलिया के सामने बौनी साबित हुई और उसे पारी और 68 रनों से हार का मुंह देखना पड़ा। सिडनी में भारत की हार के कारण-
कप्तान महेंद्र सिंह धोन


भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सिडनी टेस्ट में टॉस जरूर जीता, लेकिन इसका फायदा उठाने का मौका ऑस्‍ट्रेलिया को दियासिडनी के विकेट में पहले दिन उछाल रहा। क्यूरेटर ने खुद कहा था कि पहले दिन यहां बल्लेबाजी आसाना नहीं होगी, इसके बावजूद भारतीय कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। सिडनी में पहले दिन 13 विकेट गिरे। पहले दिन टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला धोनी ने सिर्फ इसलिए लिया था कि भारत चौथा पारी में बल्लेबाजी करने से बच सके, लेकिन वे नहीं जानते थे कि मैच में चौथी पारी तो खेलने का मौका ही नहीं आएगा।
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विराट कोहली ने शतक लगाकर दावा मजबूत किया

भारतीय टीम के मध्यक्रम के बल्लेबाज विराट कोहली ने मंगलवार को यहां सीए चेयरमैन इलेवन के खिलाफ अभ्यास मैच में शतक ठोंककर 26 दिसंबर से मेलबोर्न में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरू हो रहे पहले टेस्ट के लिए टीम इंडिया में शामिल होने का अपना दावा मजबूत किया।

आज भारत की पहली पारी 269 रनों पर खत्म हुई, जिसमें विराट कोहली ने 132 रनों का योगदान दिया। रोहित शर्मा ने 47 रन बनाए।

विराट ने अपनी 132 रनों की पारी के दौरान 171 गेंदों का सामना किया और 18 चौके और दो छक्के जमाए। विराट और रोहित के अलावा अन्य कोई भारतीय बल्लेबाज बड़ा स्कोर नहीं बना सका।
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इरफान पठान टीम इंडिया में शामिल


पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम से स्विंग गेंदबाजी के गुर सीखकर 'स्विंग का सुल्तान' कहे जाने वाले इरफान पठान की टीम इंडिया में वापसी हो गई है और यह पुरस्कार उन्हें रणजी ट्रॉफी में बड़ौदा टीम के लिए किए गए बेहतरीन प्रदर्शन के बूते पर हासिल हुआ है।

दो सालों तक टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम से बाहर रहने वाले ऑलराउंडर इरफान पठान ने अपनी वापसी के लिए खूब मेहनत की और आज उसका परिणाम सबके सामने है। इरफान ने अपना अंतिम एक दिवसीय मैच श्रीलंका के खिलाफ 2009 में खेला था, जबकि उनका अंतरराष्ट्रीय पदार्पण 2003 में हुआ था।

इरफान ने 107 वनडे मैचों की 29.91 के औसत से कुल 152 विकेट हासिल किए हैं। यही नहीं वे भारत के लिए 29 टेस्ट मैच भी खेले और टेस्ट की 54 पारियों में विकेटों का शतक पूरा किया। 2005 में इरफान ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 27 रन की कीमत पर 5 विकेट ‍हासिल करने का कारनामा किया था। एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।

टेस्ट मैचों में भी इरफान का बल्ला काफी चला है। इरफान के नाम 29 टेस्ट में 31.57 के औसत से 110 5 रन हैं जबकि वनडे में उन्होंने पांच अर्धशतक के साथ 22:80 के औसत से 1 हजार 368 रन अपने नाम के आगे लिखवाए हैं।

प्रवीण कुमार के चोटिल होने और जहीर खान की फिटनेस समस्या से ग्रस्त होने के कारण माना जा रहा था कि चयनकर्ता इरफान को मौका दे सकते हैं।

यूं भी घरेलू क्रिकेट में इरफान ने 500 से ज्यादा विकेट हासिल किए हैं और उन्हें लंबा अनुभव है, लिहाजा चयनकर्ताओं ने उन्हें नजरअंदाज नहीं किया और 9 दिसम्बर को वेस्टइंडीज के खिलाफ इंदौर में खेले जाने वाले चोथे और 11 दिसम्बर को चेन्नई में खेले जाने वाले पांचवें वनडे की टीम में शामिल किया है।

इरफान ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा था कि घरेलू क्रिकेट में बहाया गया पसीना बेकार नहीं जाएगा और वे पुन: टीम इंडिया में अपनी वापसी करेंगे।

उन्होंने कहा कि पांच वनडे मैचों की सिरीज में फिलहाल तीसरे वनडे के बाद भारत 2-1 से आगे है और उन्हें इंदौर में अंतिम 11 में शामिल किया जाता है तो वे अपनी ओर से टीम इंडिया को जीत दिलवाने और सिरीज का फैसला भारत के पक्ष में करने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे।
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सचिन तेंडुलकर : नर्वस नाइंटीज में भी विश्व रिकॉर्ड

मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर एक बार फिर महाशतक चूक गए। अपने घरलू मैदान वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में वे केवल छह रनों के मामूली अंतर से इस अद्वितीय उपलब्धि को हासिल करने से चूक गए। हालांकि अभी सचिन के पास बहुत मौके हैं, जहां वे अपना महाशतक बना सकते हैं, लेकिन क्या अच्छा होता अगर सचिन मुंबई में यह कारनामा कर देते।



इंग्लैंड दौरे पर भी सचिन ओवल टेस्ट में केवल नौ रनों से महाशतक चूक गए थे। सचिन ने टेस्ट क्रिकेट में अपना अंतिम शतक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इसी साल जनवरी में केपटाउन टेस्ट में बनाया था, जबकि वनडे क्रिकेट में उन्होंने विश्व कप 2011 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नागपुर में लगाया था। तब से सचिन ने 13 टेस्ट पारियों में चार अर्धशतक तो लगाए हैं, लेकिन महाशतक का इंतजार अभी बाकी है। इस दौरान वे दो बार शतक के करीब आकर आउट भी हुए हैं।

सचिन और नर्वस नाइंटीज का भी अजीब रिश्ता है। सचिन के नाम वनडे और टेस्ट में सबसे ज्यादा शतक बनाने का रिकॉर्ड है, लेकिन वे नर्वस नाइंटीज का शिकार भी कई बार हुए हैं। टेस्ट क्रिकेट में वे अब तक दस बार नर्वस नाइंटीज का शिकार हो चुके हैं। इन दस पारियों वे कभी भी 93, 95 और 99 के स्कोर पर आउट नहीं हुए हैं।

वनडे क्रिकेट में सचिन कुल 17 बार नर्वस नाइंटीज का शिकार हुए हैं और एक बार वे शतक के करीब (2009 में श्रीलंका के खिलाफ कटक में नाबाद 96 रन) आए। हालांकि इनमें से एक पारी में वे 96 के स्कोर पर नाबाद रहे थे, जिसे नर्वस नाइंटीज नहीं कहा जा सकता। इन 17 पारियों में वे कभी 92 के स्कोर पर आउट नहीं हुए हैं। यानी सचिन अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 27 बार नर्वस नाइंटीज का शिकार हो चुके हैं। नर्वस नाइंटीज में आउट होने में भी सचिन का कोई मुकाबला नहीं। यहां भी उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बना रखा है।

सचिन पहली बार नर्वस नाइंटीज का शिकार 1994 में श्रीलंका के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट में हुए थे। 96 रन के निजी स्कोर पर वे बोल्ड हुए थे। लेकिन तब तक वे सात टेस्ट शतक लगा चुके थे। वैसे सचिन ने टेस्ट क्रिकेट में अपना शतक 16वीं पारी में जमाया था।

सितारों से आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तेहां और भी हैं। अगर सचिन इस बार महाशतक नहीं लगा सके तो क्या, अभी कई मौके आएंगे।
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धोनी-लक्ष्मण के सामने बेबस इंडीज

भारत और वेस्टइंडीज के बीच कोलकाता के इडेन गार्डन में खेले जा रहे टेस्ट मैच के दूसरे दिन अपनी पहली पारी में विशाल स्कोर बनाया। भारत ने अपनी पहली पारी मैच के दूसरे दिन चायकाल के बाद सात विकेट पर 631 रनों के स्कोर पर घोषित की।

भारत के इस बड़े स्कोर में राहुल द्रविड़ (119), वीवीएस लक्ष्मण (नाबाद 176) और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (144) ने शतकीय प्रहार किए।


आज दूसरे दिन के खेल की शुरुआत में कल के नाबाद बल्लेबाज लक्ष्मण के साथ युवराज सिंह क्रीज पर उतरे। 25 रन के निजी योग पर युवराज डेरैन सैमी की गेंद पर पगबाधा आउट हुए। युवराज और लक्ष्मण ने छठवें विकेट के लिए 50 रन जोड़े। दूसरे छोर पर लक्ष्मण ने अपनी चिरपरिचित शैली में बल्लेबाजी जारी रखी और अपने टेस्ट करियर का 17वां शतक जमाया।

लक्ष्मण और धोनी ने लक्ष्मण के साथ भारतीय पारी को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। धोनी ने अपनी पारी की संयमित शुरुआत की और विकेट पर नजरें जम जाने के बाद वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की बखिया उधेड़ दी। धोनी ने तेजी से अपने टेस्ट करियर का पांचवां शतक पूरा किया। उन्होंने 175 गेंदों का सामना करके 10 चौके और पांच छक्कों के साथ 144 रनों की पारी खेली। धोनी को केमर रोच ने आउट किया।

धोनी और लक्ष्मण ने सातवें विकेट के लिए 224 रनों की साझेदारी की, जिसमें धोनी का योगदान 144 रनों का रहा। लक्ष्मण 12 चौकों के साथ 176 रन बनाकर क्रीज पर डटे रहे और वे अंत तक आउट नहीं हुए।

टेस्ट क्रिकेट में भारत ने आज आठवीं बार वेस्टइंडीज के खिलाफ 500 से ज्यादा का स्कोर खड़ा किया। इससे पहले भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सात बार 500 या उससे अधिक रनों का स्कोर बनाया और इन सभी मैचों में टेस्ट का कोई नतीजा नहीं निकल पाया।

वेस्टइंडीज के लिए समी और रोच ने दो-दो विकेट लिए। फिडेल एडवर्ड्स, क्रैग ब्रेथवेट और देवेंद्र बिशू ने एक-एक विकेट लिया।
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सचिन तेंडुलकर के महाशतक का बढ़ा इंतजार

मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर आज यहां शुरू हुए भारत वेस्टइंडीज टेस्ट के दौरान 38 रन बनाकर पैवेलियन लौट गए। इस तरह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सचिन के 100वें शतक के लिए इंतजार और बढ़ गया।


सचिन अब तक टेस्ट और वनडे में कुल 99 शतक जमा चुके हैं और उनके 100वें शतक का सभी को बेसब्री से इंतजार है। उम्मीद थी कि सचिन यहां अपना यादगार शतक बनाएंगे, लेकिन वे यहां 71 गेंदों का सामना करके बिशू की गेंद पर 38 रनों पर पैवेलियन लौट गए। उन्होंने पांच चौके जमाए।

पिछले चार वनडे और छह टेस्ट मैचों में सचिन कोई शतक नहीं लगा पाए हैं। हालांकि अभी कोलकाता टेस्ट में उन्हें एक बार और बल्लेबाजी का मौका मिल सकता और इसके बाद सिरीज में अभी मुंबई टेस्ट भी बाकी है।
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सुरेश रैना की प्रतिस्पर्धा खुद से

वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट मैच के लिए टीम से बाहर रखे गए भारतीय ऑलराउंडर सुरेश रैना ने कहा है कि मौजूदा क्रिकेट में उनकी प्रतियोगिता किसी और खिलाड़ी से नहीं बल्कि खुद से है।

टीम में नहीं चुने जाने के बाद पंजाब के खिलाफ यहां रणजी मैच में शानदार दोहरा शतक ठोककर चयनकर्ताओं को करारा जवाब देने वाले रैना ने कहा पिछले कुछ मैचों में क्रीज पर लंबे समय तक बस टिके रहना मेरी रणनीति का हिस्सा था लेकिन आगे चलकर इसके कारण रन बनाने में दिक्कत आई।

उन्होंने कहा वेस्टइंडीज में मेरा प्रदर्शन काफी अच्छा ही रहा था जब मैंने उस दौरे पर तीन अर्द्धशतक बनाए। लॉर्ड्स टेस्ट में अपने 80 रन की पारी की बदौलत मैं मैच बचाने में कामयाब रहा लेकिन इसके बाद दुर्भाग्य से मैं रन नहीं बना सका।

जब उनसे टीम इंडिया में अपना स्थान पक्का करने के बारे में पूछा गया तो रैना ने कहा मैं सिर्फ खुद से प्रतियोगिता कर रहा हूं। इस समय मेरी उम्र सिर्फ 24 वर्ष है और मैं हर फार्मेट में सफल होना चाहता हूं। जहां तक टीम की बात है निश्चित रूप से मैं टीम इंडिया में जगह पक्का करना चाहूंगा।

रैना ने कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज जैसी टीमों के खिलाफ हर जगह खेलना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहते हैं और घरेलू क्रिकेट में भी खुद को स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पांच से छह बडी पारियां उन्हें इस लक्ष्य को पाने में मदद करेगी।

पंजाब के खिलाफ इस मैच में अपनी पारी के बारे में रैना ने कहा यह पारी मेरे लिए काफी अच्छी रही। मैं तो केवल वनडे की अपनी फॉर्म को लंबे फॉर्मेट में भी बरकरार रखना चाहता था और ऐसा करने में कामयाब रहा।

उन्होंने कहा यह दोहरा शतक काफी खुशी देने वाला है। मैं छठे-सातवें नंबर पर भी बल्लेबाजी कर खुश हूं। इस क्रम में रन बनाना आसान नहीं होता है लेकिन मैं बड़ी पारी खेलने में कामयाब रहा।

तिहरे शतक की संभावना के बावजूद पारी घोषित करने के बारे में पूछे जाने पर रैना ने कहा मैं स्वार्थी नहीं बनना चाहता हूं। टीम का हित पहले है और जीत ज्यादा जरूरी हैं। आप अगर ध्यान दें तो भारतीय टीम के वेस्टइंडीज दौरे पर भी मैंने टीम हितों को हमेशा तवज्जो दी।
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बन रहा है सचिन के महाशतक का योग

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक का सभी को बेसब्री से इंतजार है और अंक गणना के आधार पर देखा जाए तो कोटला टेस्ट में उनके महाशतक का योग बन रहा है।

कोलकाता के क्रिकेट पंडित श्रीकांत पोद्दार ने इस गणना के बारे में बताया कि भारत ने जब पहली बार 1911 में विदेशी दौरा किया था तो उसके अब 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। हालांकि यह आधिकारिक दौरा नहीं था। भारत के आधिकारिक तौर पर क्रिकेट खेलने की शुरआत 1932 में हुई थी।

पोद्दार ने कहा कि सचिन के तीनों तरह की क्रिकेट में इस समय 33086 रन हैं, जिनका कुल योग 20 बनता है। सचिन तीनों फॉर्मेट में अब तक 668 बार आउट हुए हैं और इसका योग भी 20 बनता है। उन्होंने बताया कि तीनों प्रारूप में सचिन का औसत 49.52 है और इन चारों अंकों को जोडने पर भी 20 आता है।

पोद्दार ने कहा कि अंग्रेजी में महाशतक को 'टन ऑफ टन्स' कहा जाता है और अंग्रेजी वर्णमाला में 'टी' अक्
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